विज्ञापन

इन बैलों की मस्तानी चाल

Sanjai kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आओ चले बैलगाड़ी पर चढ़कर
        
                                                    
                            
बेरोजगार हैं हम भी पढ़कर
गाड़ी वाले चले अकड़ कर
मरते कितने प्रतिदिन लड़कर।

इन बैलों की मस्तानी चाल
खुर के टॉप मिलाते ताल
गले घंटिका टुनटुन करती
जीवन में है खुशियां भरती।।
––संजय कुमार गुप्त ‘अबोध’
3 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kumar

10845 कविताएं

View Profile

Dn Chaubey

7356 कविताएं

View Profile