साहब को पसंद आए
उसका ही बौछार
जो नाम अमृत रखके
सबको रहा है मार
ले ही नहीं सकता
उससे कोई टक्कर
हर मोड़ पर साहब
उससे खड़े हैं सटकर
-कुँवर संदीप सिंह