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कवि का आइना

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कवि जब भी आईना दिखाता है
        
                                                    
                            
सभी अदाकारों का चित्र आता है
कवि कहता है नाम किसी का नहीं
सच है नाम किसी का बचा ही नहीं
नाटक है गतिमान मंच सर्वदा तैयार
कोई इस पार कोई पर्दे के उस पार
जो जहां मनमाफिक पा जाता है राह
उसी ओर चलता है करते वाह-वाह
-कुँवर
एक दिन पहले
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