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बदबू गुलाब से

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आने लगे जब भी बदबू गुलाब से
        
                                                    
                            
समझो उसने आब सारा खो दिया है
जिसने उसे सँवारा था खुशबू ख़ातिर
आत्मा ने उसके भी अब रो दिया है
तोड़ नाता तने से भौरे को सुलाए
रिश्तों के क़त्ल के बीज बो दिया ही
कैसे नहीं मरती तेरी आत्मा कुँवर
त्वचा का मोटापा कितना हो गया है

- कुँवर संदीप सिंह
2 महीने पहले
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