समुद्र मंथन से अमृत निकल गया
देव और दानवों में संग्राम छिड़ गया
देवता थे चालाक एक कलश मंगाए
नाम अमृत दे उसमें विष भर लाये
वही विष अब दिखा चमत्कार रहा है
अमृत के नाम से सभी को मार रहा है
-कुँवर संदीप सिंह