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होता तो चला आता।

सुनील देव

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कहानी में मेरा क़िरदार होता तो चला आता।।
        
                                                    
                            
कोई मेरा भी तरफ़दार होता तो चला आता।।

अकसर डूबते देखी है कस्ती साहिलों पर ही,,
अगर डर बिच मंझधार होता तो चला आता।।

मेरे इस दिल से भी उम्मीद रखनी छोड़ दी मैने,,
अगर जरा भी हवादार होता तो चला आता।।

बड़ी मुश्किल से संभला है के छोड़ दो उसको,,
अगर तू मेरा ग़म-ख़्वार होता तो चला आता।।

हज़ारों मील की दूरी और उस पे साथ ना कोई,,
अगर सफ़र भी मज़ेदार होता तो चला आता।।

चलो अच्छा हुआ के टूट गए सारे भ्रम दिल के,,
दिल थोड़ा भी गुनाहगार होता तो चला आता।।

जवानी की गलतफहमियां ही याद रह गई देव,,
अगर कुछ भी समझदार होता तो चला आता।।
-सुनील देव
6 दिन पहले
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