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दिल किसी के प्यार में।

सुनील देव

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उधार की आँखें रही और दिल किसी के प्यार में।।
        
                                                    
                            
रस्म ए उल्फ़त निभा गया वो ज़िंदगी से प्यार में।।
जब भी कुछ चाहा किसी से मुँह के बल जा गिरे,,
आँख खुलते ही लिपट गए ग़म बेखुदी से प्यार में।
दूर से अच्छा लगा सब चाँद भी और बरसात भी,,
ख़्वाब में डूबा रहा बस हर पल किसी के प्यार में।।
क्या कहेंगे अब किसी से अपना तो सब लुट गया,,
बैठे बैठे लुट गए हम बस अपनी ख़ुशी से प्यार में।
कौन अब समझे किसी को सब के सब है मतलबी,
हम भी ये क्या कर गए इक अजनबी के प्यार में।।
जान भी अटकी हुई है अब जान में किसी ग़ैर के,,
जां बचाने के लिए दिल दे दिया ख़ुशी से प्यार में।।
काश के अपना भी यहाँ कोई हाल ए दिल पूछता,,
करते ना हम भी खता देव यां किसी के प्यार में।।
-सुनील देव
3 दिन पहले
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