विज्ञापन

आईनें से पूछना।

सुनील देव

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हाल क्या है अपना ये अब आईने से पूछना।।
        
                                                    
                            
रंग कैसा है फ़िज़ा का अब आईने से पूछना।।

दास्तां अपनी सुनाकर तुम तो यूँ ही चल दिए,
कैसे गुजरी उम्र अपनी अब आईने से पूछना।।

रास्तें तो मिलते रहे मगर मंज़िलें सब खो गई,,
बूँद बनकर कैसे टपके तब आईने से पूछना।।

आँख में तेरी हज़ारों जब अक्स होंगे रात भर,,
दर्द की अपनी कहानी अब आईने से पूछना।।

ज़िस्म की ना-तुवानी जब जोरों पे होगी कभी,
ज़िंदगानी का सफ़र ये तब आईने से पूछना।।

ख़ाक़ हो जाएंगे हम जब जिस्म होगा ये फ़ना,,
रूह का मेरी ठिकाना तब आईने से पूछना।।

कैसे होता हैं गुज़ारा साँस बिन जिस्मों का देव,,
इश्क़ करके जिंदा रहना तब आईने से पूछना।।
-सुनील देव
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

13403 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

11075 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

854 कविताएं

View Profile

Dr fouzia

6944 कविताएं

View Profile