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आदमी नहीं

सुनील देव

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आदमी है हर जगह पर आदमी नहीं।।
        
                                                    
                            
आसमां हैं सर पर मगर चाँदनी नहीं।।

क्या करेंगे जिंदगी को और खींचकर,,
इतने बड़ा जहान में सर रौशनी नहीं।।

चेहरे से भी छुपा ना सके हाल देखिए,,
छायी रही उदासी मगर ताज़गी नहीं।।

आंसू क्या बह चले के मशहूर हो गए,,
इसके लिए कोई पत्थर लाज़मी नहीं।।

उसके बाद किसी को देखा नहीं यहां,,
आंखों में रहा हर सफ़र अजनबीं नहीं।।

उसे क्या कहेंगे जब दिल ही भूल गया,,
कैसे गुज़ारा ग़म कर पहर याद ही नहीं।।

दोस्त भी देते मेरा देव कब तलक साथ,,
उससे क्या मिले के आज घर कहीं नहीं।।
-सुनील देव
3 महीने पहले
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