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अगर पूछे कोई जिंदगी की परिभाषा

Sakshi Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अगर पूछे कोई जिंदगी की परिभाषा
        
                                                    
                            
लिखूंगी मै एक अंजान दास्ता
संभाल न पाए कोई इसकी लगाम
बेबस है इसके सामने हर इंसान
खूबसूरती से भरी है इसकी शुरुआत
पर अंत से है हर कोई अज्ञात
भले ही हजार ठोकरों से ये गिराती है
पर अकेले चलना भी यही सिखाती है
कभी अपनो के पास होने की खुशी
कभी अकेले हो जाने का गम
गिराती संभालती है हर बार
जिंदगी है शायद इसी का नाम
 
3 दिन पहले
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