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धड़कन में चल रहा है जो वो शोर तो नहीं है

Sachin Pratap

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            धड़कन में चल रहा है जो वो शोर तो नहीं है,
        
                                                    
                            
जाकर ज़रा ये देखो कोई और तो नहीं है।

दिल खिंच रहा है जिसकी तरफ़ बेख़ुदी में आज,
उस अजनबी की चाहत का ये छोर तो नहीं है।

बाँधा है जिसने हमको बिना कुछ कहे-सुने,
वो याद की पुरानी कोई डोर तो नहीं है।

सहमे हुए हैं पेड़ हवाओं के ख़ौफ़ से,
सावन के इस महीने में ये मोर तो नहीं है।

चलते ही जा रहे हैं ज़माने के साथ हम,
हालात पर हमारा कोई ज़ोर तो नहीं है।

टूटे हुए खिलौने सा बिखरा है जो यहाँ,
कल तक जो आदमी था ये वो तौर तो नहीं है।
1 सप्ताह पहले
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Pankaj Sharma

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