विज्ञापन

पहले लगे

Sachin Nigam

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर शौख पे पहरे लगे
        
                                                    
                            
हर तमन्ना मिटाई गई
दिल मे जगी जो लौ कभी
तो दिल मे ही बुझाई गई ,
हम करते रहे इन्तजार
इन्तजार सिर्फ इन्तजार
और इन्तजार की घड़िया बढाई गई,
हर शौख पे पहरे लगे
हर तमन्ना मिटाई गई,

जो कमी थी ही नही
वो कमी बताई गई
हर सीखी हुई अदा
फिर से सिखाई गई,
हम जलते रहे बुझते रहे
बुझ बुझ के जलते रहे
फिर चन्द शोलो से
ख्वाहिशो की बस्तियां जलाई गई,
हर शौख पे पहरे लगे
हर तमन्ना मिटाई गई,

लड़ते रहे निहत्थे
जंग ऐ बाजार मे
कटते रहे मिटते रहे
तलवार की धार पे,
होता रहा इम्तिहान
और हम फेल होते गए
जो खत्म ना हो सका
वो खेल होते गए,
खेल खेल मे अपनी
दुनिया ढहाई गई
हर शौख पे पहरे लगे
हर तमन्ना मिटाई गई,

हर तरह से दिल को
समझाना ही पड़ा
खुद को खुदी की नजरो मे
गिराना ही पड़ा,
लगे रहे शिद्दत से
फिर भी हम डूबे
खडे हो के आईने मे
अपने को हम ढूढे,
हर समस्या के आगे
अपनी समस्या भुलाई गई
हर शौख पे पहरे लगे
हर तमन्ना मिटाई गई
दिल मे जगी जो लौ कभी
तो दिल मे ही बुझाई गई,

- सचिन निगम
बाराबंकी
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

श्री सनातन

671 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13377 कविताएं

View Profile

Dn Chaubey

7459 कविताएं

View Profile