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आ रहा हूं

Sachin Nigam

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लगातार जिए जा रहा हूं
        
                                                    
                            
कई जुर्म किए जा रहा हूं

इसने दी उसने दी सबने दी
बद्दुआएं लिए जा रहा हूं

एक ही तो ख्वाहिश थी
वह भी पिए जा रहा हूं

बोझ समझकर जो रखना ही पड़ा
वो दान में दिए जा रहा हूं

सजा होनी है तय है
कटघरे सजाए जा रहा हूं

सज चुकी है ये अंधेरी कोठरी भी
श्रृंगार बनाएं जा रहा हूं

मुझे उम्मीद है कोई रोकेगा
क्या हुआ किस लिए जा रहा हूं

खुली हवा में है सांस लेना मुश्किल
वहां मैं इसलिए आ रहा हूं
-सचिन निगम
2 सप्ताह पहले
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