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तुम कैसे हो?

Rupa Kumari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम कैसे हो?
        
                                                    
                            
मैं पूछती हूँ, "अक्सर तुम कैसे हो?"
एक उम्मीद के साथ कि वो कहेगा
"मैं ठीक, तुम बताओ।"
फिर मैं बता दूँगी, "मैं ठीक नहीं हूँ।"

मैं सब बता देती हूँ, इस उम्मीद में, कि कोई समझेगा मेरी मनोदशा, मेरे दुःख, मेरी तकलीफें।
देगा कोई समाधान, सहारा और सलाह।
पर यकीन मानो, ऐसा कोई नहीं है..
जो तुम्हें सुनेगा..
जो तुम्हे सुनेगा वो, तुम पर हँसेगा।
जो तुमसे जुड़ेगा ,वो तुमको जंचेगा।

कई होंगे जिनकी ज़रूरत बन जाओगी तुम
ज़रूरत पूरी होते ही बे-ज़रूरत हो जाओगी।

" फिर मेरी किस्मत बुरी है,"
यह सोच कर फिर सब कुछ सह जाओगी तुम।
इसलिए, तुम पूछना हर रोज खुद से  से कि..
कैसी हो तुम ।
अगर पाना की ठीक नहीं हो....
तो चूम लेना अपनी हथेलियों को,
सहला लेना प्रेम से  खुद के गाल, बाल
देना एक थपकी प्रेम की ।
और कहना ...
"एक दिन सब ठीक हो जाएगा।"
यकीन मानो एक दिन सब ठीक हो जाता है।
-रूपा  कुमारी
एक महीने पहले
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