विज्ञापन

भ्रम की माया मन को बड़ी

Rudraksh Tandel

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कहवत-कहवत होत क्या,
        
                                                    
                            
जीवन उलझत जाए,
भ्रम को सहारा लेको तो,
भ्रम जीवन दे सुलझाए।

जय की गाथा सब सुनत,
पराजय न किसि को भाए,
भ्रम में रहवत सब सुखी,
जो निकला, वो कुछ कर दिखाए।

चेतना जीवन को समझाए,
भ्रम की वो परिभाषा,
उलझावत है भ्रम हृदय को,
देवत है बस आशा।

ख़्वाब का जाला डाल के,
भ्रम मनको बहुत बहलाए,
चिता पर लाकर छोड़त है,
दर-दर ठोकर खिलवाए।

जो समझे इस भ्रम का,
बड़ा भयानक जंजाल,
आगे बढ़े जीवन मे वह,
भ्रम की साज़िश टाल।

इस्तेमाल करे जो भ्रम को,
सोच-समझकर आज,
भ्रम को वापर करत सही,
भ्रम बनो उसकी ढाल।

काल से कइयों बचत न पाए,
भ्रम बड़ा विकराल,
जीवनपर्यंत साथ रहे,
बुनत रहे वो जाल।

भ्रम की माया मन को बड़ी,
सुखी-सुखी सी भाए,
भ्रम की माया मनुष्य को,
मौत की नींद सुलाए।

काया-माया मन की,
समझो, समझ न आवे,
दुःख का प्याला होत भी,
सुख की झील है लागे।
2 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7409 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

13147 कविताएं

View Profile