विज्ञापन

सच्ची लाइन

Ruchi Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सबके होते हुए भीकभी-कभी
        
                                                    
                            
कितने अकेले हो जाते हैं हम
कहने को तो कितना कुछ है मन में
फिर भी इतना खामोश रह जाते हैं हम
भर जाती है कभी-कभी अपनीनजरे
इतना ज्यादा की उसे छुपाते रहते हैं हम
दिल में अपने दर्द छुपा कर
मुस्कुराते रह जाते हैं हम

 
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Prasoon Saxena

973 कविताएं

View Profile