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सच्चा प्रेम

Ritu Matawale

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शब्द एसे हो कि,दिल मे उतर आए।
        
                                                    
                            
दूरिया हो कर भी, प्यार बढ़ता जाए।
दिल खिलौना नही है, इसे खेला ना करो।
किसी को दिल दे कर,दिल तोड़ा ना करो।
मोहोब्बत ,मांगने से नही मिलती।
प्यार कहने मात्र से ,किसी को नही होती।
प्रेम तो दिल की सच्चा भाव है, हर किसी से नही होती।
मन की उपज,अक्सर धोखा ही देती है।
हृदय से निकली भाव,अक्सर सच्चा होती है।
दिल मे बसने वाले,दूर रह कर भी पास होती है।
हो चाहे मन की अंतरद्वंद, तो पर भी साथ देती है।
किसी के प्रति स्नेह,और श्रद्धा भी प्रेम होती है।
दुख के आँसू पोछने वाले भी,एक सच्चा प्रेमी होते हैं।
दर्द की दवा बन कर,कोई दिल मे उतर आता है।
भगवान की दुवा बन कर,दिल मे ही रुक जाता है।
निष्कपट सहारा बनना भी,सच्ची प्रेम की निशानी है।
किसी के दिल को सुकून देना भी,प्रेम की अनमोल निशानी है।
चाहत लब्जो से नही,दिल से दिल की होती है।
इसीलिए तो मोहोब्बत,हर किसी से नही होती है।
मोहोब्बत के सफर में,पतझल भी सावन लगता है।
सच्ची चाहत में,बेमौसम भी,वर्षा करता है।
कभी गुलाब तो,कभी पलास बन दिल मे रहता है।
चन्दन की खुसबू से,तन-मन महकता है।
हरियाली और सावन भी,झूमने लगता है।
हो सच्ची प्रेम जिसे,आनन्द और उल्लास से महकता है।
जैसे आये हो हर दिन सावन,दिल भी एसे लगता है।
हर रात सुहानी होती है, पास ना हो कर भी पास लगती है।
प्रेम सच्चा हो तो,हर दिल को सुकून मिलती है।
जैसे हो प्रकृति के मनोरम दृश्य ,आँखो में ही रहती है।
शांत सरोवर की गहराई में,जैसे पलता हो प्रेम सदा।
मन की विचलित धारा में,बहती हो सच्चा प्रेम सदा।
झरने की झर-झर आवाज,पायल की झंकार लगती है।
नदियों की बहती अविरल धारा,जैसे प्यार लगती है।
सच्चा प्रेम सदा,दिल दिमाक में रहती है।
ना हो पास फिर भी,दिल को सुकून देती रहती है।
सच्चा प्रेम, सदा हृदय में रहती है।
पास ना हो कर भी,सदा ही पास लगती है।
2 महीने पहले
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