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उल्लुओं की निकली बारात।

Ritik Patel

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आधी रात
        
                                                    
                            

आधी रात,
उल्लुओं की निकली बारात।
कौवे चुप हैं,
कोयल गुम है।

चाँद बादलों में
मुँह ढककर सोया हुआ है,
मानो हमसे कह रहा है—
आधी रात का समय हो रहा है।

पर मैं तो जागा हुआ हूँ,
टहल रहा हूँ,
पूछ रहा हूँ—

कैसा उल्लू?
कैसा कौवा?

किसका चाँद?
किसकी बारात?
कैसी आधी रात?

बोलो,
क्यों करते हो बात?
2 दिन पहले
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