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माता पिता को छोड़कर शहर में बसना

Rinkee goswami

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर गली ढूंढ़ती है शहर का ठिकाना
        
                                                    
                            
गांव छूटे हैं कोई बना के बहाना
इतने दिनों तक रहे तुम जहां
गुजरा है बचपन खेला है जमाना
जा माटी की खुशबू सताएगी तुझको
जितना है रोई मां रुलाएगी तुझको
ये दौलत,ये सौहरत, है वजूद क्या इसका
जब होगा तू बूढ़ा बताएगी तुझको
कभी हाल पूछो, कभी तो बताओ
मिले गर समय तो बैठकर तुम सुनाओ
न छोड़ा तुझे ,कभी भी अकेला
तू जो गया फिर न उसको बुलाया
क्या होता अगर छोड़ जाती वो बचपन में
देता तू गाली न जाता तू आंचल में
करे गर यहीं वो तो क्या बीतेगा तुझपर
बताते हो तुम ये तो बीता है सबपर
एक महीने पहले
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