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हम रोकर भी क्या पायेंगे

Rinkee goswami

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            छोड़ उम्मीदें मर जायेंगे, हम रोकर भी क्या पायेंगे।
        
                                                    
                            
होंठ भी सूखे सूखे हो गए,अब हंसकर भी क्या पायेंगे।

गर नदियों में पानी न होगा, तो नदियां, नदियां न होंगी।
फ़िर सूखी नदियों में बहकर,रहकर भी हम क्या पायेंगे।

रात अंधेरी उलझी है, राह दिखे न साथ दिखे।
चारों ओर अंधेरा है फिर, जुगनू बनकर भी क्या पायेंगे।
2 महीने पहले
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