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प्रियवर का ध्यान गया उस ओर

Rikesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उस पार से आ रही गान
        
                                                    
                            
सहसा टूटा प्रियवर का ध्यान
सोचा प्रिय का होगा वंदन
परंतु था अबला का क्रंदन

वो युग-युग से रही चीख
मांग रही लय का भीख
विनय भाव और प्रणय
चाहती है स्वर पर जय।

कंठ में रागनी भर के
वो मांगती लय पर से
वहीं है उसका प्रीत
जिसके लिए वह गाती गीत।

प्रियवर का ध्यान गया उस ओर
अबला का गिर गया लोर
हो प्रियवर का आलिंगन
भर गया भावों से मन ।

स्वर पर विजीता बनी प्रिय
कंठ में भरी रागनी लय
वो गाती प्रियवर का गान
भरती वीणा पर तान ।

प्रियवर का हृदय विभोर
निशीथ में मन भागे उस ओर
लय में प्रियवर का तार
झुम उठता यह संसार।
1 सप्ताह पहले
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