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एक कथा जवानी के शेष

Rikesh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            देखो कहीं अपना पुराना चित्र
        
                                                    
                            
याद करो बचपन का मित्र
खेल कूद मस्ती का पल
खुद को समझते थे खुब प्रबल।

जब जगी यौवन की आग
जीवन के कुछ झरे पराग
उदासीन औ’ याद विलास
जीवन के अब गए उल्लास।

कैसी थी वह नगर-परिवेश
एक कथा जवानी के शेष।
2 महीने पहले
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