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पलक झपकते

Reshma Kumari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पलक झपकते
        
                                                    
                            
जीवन गुजर जाएगा,
पल दो पल का बसेरा है,
मिट्टी से आया है,
मिट्टी में मिल जाएगा।

मौका न चूक,
चल थोड़ा खेल ले,
खुद को भी देख ले।

तू ही मिट्टी,
तू ही आसमाँ,
तू ही हवा
और
तू ही प्रकाश है।

तू लुटेरा नहीं,
कोई चोर नहीं और
अपना कोई घर भी नहीं।
फिर बता—
कहाँ और कैसे
ले जाएगा...?

मिट्टी से आया है,
मिट्टी में मिल जाएगा।
एक दिन पहले
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