विज्ञापन

खुद ही से पूछता रहता हूं एक सवाल

Ravindra Sardeshmukh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खुद ही से पूछता रहता हूं एक सवाल
        
                                                    
                            
क्यों मचा रहता दिमाग में अक्सर बवाल
मेरी ही बागडोर मेरे हाथ में नहीं है तो
दूसरों पर ज़ब्त कर लूं क्या लाज़मी है ये मवाल
क्या शाम का रात में तब्दील होना फितरतन समझें
फिर रात के होने का क्यों कर बना हुआ है मलाल
तनहा गुज़रती हैं रातें तो महफ़िल में शरीक हों
सहर भी तो बा जाब्ता लेकर आती है बिलाल
सुबह शाम रात और दिन पर अपना कोई इख्तियार नहीं
'रवि' यूं ही चला चल बनाकर कुदरत को मिसाल
-कवि 'रवि'
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all