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समन्दर खारा न होता, तो हर प्यासा उसे पी जाता

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            समंदर भी झुक जाता, अगर इरादों में किनारा न होता,
        
                                                    
                            
लोग बिक जाते ज़मीर से, अगर दिल में अंगारा न होता।

जेब में दौलत नहीं, तो क्या हुआ, दिल में जुनून होना चाहिए,
वक़्त बदलने के लिए सीने में एक तूफ़ान होना चाहिए।

सिक्कों से कभी इंसान की पहचान नहीं होती,
बिना ज़मीर के दौलत भी मेहरबान नहीं होती।

जेब में गांधी हों, ये मुक़द्दर की बात है,
दिल में इंक़लाब हो, तो कोई हार नहीं होती।

समंदर खारा न होता, तो हर प्यासा उसे पी जाता,
इंसान में आग न होती, तो हर तूफ़ान उसे झुका जाता।

जेब की दौलत से भला कितने दिन इतराओगे,
दिल में आँधी हो तो पत्थर में भी रास्ता बनाओगे।

जेब ख़ाली हो तो क्या, आँखों में ख़्वाब होना चाहिए,
हार सामने खड़ी हो, फिर भी जवाब होना चाहिए।

दौलत तो वक़्त के साथ आती-जाती रहती है,
सीने में अपने वजूद का सैलाब होना चाहिए।

हमारी औक़ात का फ़ैसला सिक्के नहीं करेंगे,
हमारे हौसलों का सौदा ये ज़माने नहीं करेंगे।

जेब में गांधी हों या वक़्त की मार हो,
दिल में आँधी हो तो हम हार स्वीकार नहीं करेंगे

जेब में गांधी हों या न हों, हमें इसकी परवाह नहीं,
दिल में आँधी हो तो फिर मंज़िल की कोई राह मुश्किल नहीं।

समंदर की ख़ुद्दारी है कि खारा होकर भी क़ायम है,
जो अपने उसूलों पर जिए, उससे बड़ा कोई सिकंदर नहीं।
-रतन कुमार कैथवास
1 सप्ताह पहले
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