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मनाली की स्नोफॉल

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बर्फ की गेंद बनाकर मुझे मार रही है,
        
                                                    
                            
मैं जब भागता हूँ तो उसे बहुत मज़ा आ रहा है...
मनाली की वादियाँ उस दिन,
सफ़ेद चादर ओढ़े बैठी थीं।
तीन बार आया था इस शहर में,
मगर बर्फ़ गिरते हुए,
सिर्फ़ दूसरी बार देख पाया था।


शायद कुछ नज़ारे भी,
हर किसी को बार-बार नहीं मिलते।
पहला गोला उसने,
बिना किसी ऐलान के फेंका।
सीधा मेरे कंधे पर आकर लगा।
मैंने पलटकर देखा,
तो वो दोनों हाथ कमर पर रखे,
शरारती मुस्कान के साथ बोली…
"पकड़ सकते हो तो पकड़ लो!"
मैं भी कहाँ हार मानने वाला था,
एक मुट्ठी बर्फ़ उठाई,


मगर उसके भागने की रफ़्तार देखकर,
मेरी सारी बहादुरी,
जूते के नीचे दब गई।
वो आगे-आगे भाग रही थी,
मैं पीछे-पीछे...
कभी वो मुड़कर जीभ चिढ़ाती,
कभी एक और बर्फ़ का गोला बना कर फेंक देती।

मैंने आवाज़ लगाई…
"रुक जा... एक बार हाथ आ जा,
फिर हिसाब बराबर करूँगा।"
वो और ज़ोर से हँसी।
बोली…
"पहले खुद को संभाल लो जनाब!"
बस फिर क्या था...
जल्दी-जल्दी भागते हुए,
मेरा पैर बर्फ़ पर फिसला,
और मैं धड़ाम से,
उसी सफ़ेद ज़मीन पर जा गिरा।
कुछ पल के लिए,
पूरा आसमान घूम गया।

मैंने सोचा,
अब तो वो दौड़कर हाथ पकड़ लेगी।
मगर...
उधर से जो आवाज़ आई,
वो चिंता की नहीं,
ठहाकों की थी।
वो पेट पकड़कर हँस रही थी।
इतना हँसी कि,
आँखों में आँसू आ गए।

बार-बार उँगली से मेरी तरफ़ इशारा करके कहती…
"अरे... देखा!
हीरो बनने निकले थे,
और बर्फ़ ने ही विलेन बना दिया!"
मैं ज़मीन पर बैठा,
झूठा गुस्सा दिखाता रहा,
और वो हर ठहाके के साथ,
और भी ख़ूबसूरत लगती गई।

मैंने कहा…
"इतना मत हँसो...
लोग समझेंगे मैं गिरा हूँ,
असल में मैं तो जान-बूझकर गिरा था,
ताकि तुम्हारी ये बेफ़िक्र हँसी,
थोड़ी देर और सुन सकूँ।"

वो एक पल को चुप हुई,
फिर मेरे पास आई,
हाथ आगे बढ़ाया और बोली…
"चलो... अब उठ भी जाओ।"
मैंने उसका हाथ थाम लिया।
उठ तो मैं उसी पल गया था,
लेकिन सच कहूँ...
उस दिन मुझे बर्फ़ ने नहीं गिराया था,

मैं तो उसकी खिलखिलाती हँसी में,
कब का हार चुका था।
मनाली की उस स्नोफ़ॉल ने,
सिर्फ़ पहाड़ों को सफ़ेद नहीं किया,
उसने मेरी यादों पर भी,
एक ऐसी परत बिछा दी,
जो हर सर्दी में फिर से चमक उठती है।
-रतन कुमार कैथवास
2 महीने पहले
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