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कोई गल नहीं

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आइना क्या बताएगा,
        
                                                    
                            
ख़ूबसूरती तुम्हारी,
वक़्त हो तो,
देख लेना,
आँखों में हमारी।
वो मुस्कुराई।
मैंने कहा…
"तुम्हारी बातों का तो,
मैं मुरीद हो गया हूँ।
समझ नहीं आता,
तुम्हें क्या दूँ?
क्या अपने सुख-चैन दे दूँ?"
उसने हँसते-हँसते,
सिर हिलाया।
बोली…
"इतनी बड़ी-बड़ी बातें,
कब से करने लगे?"
मैंने कहा…
"जब से तुम मिली हो,
तब से हर छोटी बात भी,
बड़ी लगने लगी है।"
वो कुछ पल,
चुपचाप मुझे देखती रही।
फिर धीरे से बोली…
"मैं तो तुम्हारी आँखों की,
क़ायल पहले से ही थी।
उनमें जो सच्चाई है,
वो किसी तोहफ़े से बड़ी है।
अब कुछ नया करने की,
ज़रूरत नहीं है।"
मैंने राहत की साँस ली।
बोला…
"सच?
फिर मुझे कुछ साबित नहीं करना?"
उसने शरारत से कहा…
"नहीं...
बस एक काम करना।"
मैंने उत्सुक होकर पूछा…
"क्या?"
वो मेरी तरफ़ थोड़ा झुककर बोली…
"मेरे रहते,
ज़्यादा लोड मत लिया करो।
हर बात का बोझ,
अपने कंधों पर मत उठाया करो।
कुछ फ़िक्रें मुझे भी दे दिया करो।
मोहब्बत का मतलब,
सिर्फ़ किसी को हँसाना नहीं होता,
उसकी थकान में,
थोड़ा-सा हिस्सा बन जाना भी होता है।"
मैंने मुस्कुराकर कहा…
"अगर मेरी परेशानियाँ,
तुम्हें भी परेशान करने लगें तो?"
वो खिलखिलाकर हँसी।
बोली…
"कोई गल नहीं।"
मैंने पूछा…
"इतना भरोसा?"
वो बोली…
"हाँ...मुझसे भी ज्यादा,
क्योंकि रिश्ते वहाँ नहीं टिकते,
जहाँ दोनों हमेशा मज़बूत बने रहें।
रिश्ते वहाँ साँस लेते हैं,
जहाँ एक दिन तुम मेरा सहारा बनो,
और किसी दूसरे दिन,
मैं तुम्हारा।"
मैंने पहली बार महसूस किया,
मोहब्बत का सबसे कीमती तोहफ़ा,
महँगे उपहार नहीं होते।
वो एक साधारण-सा वाक्य होता है,
जो दिल के सबसे मुश्किल दिनों में,
मरहम बनकर उतरता है…
"मेरे रहते ज़्यादा लोड मत लिया करो...
कोई गल नहीं।"
उस दिन समझ आया,
कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में,
खुशियाँ लेकर नहीं आते,
वे हमारी चिंताओं का वज़न,
आधा करने आते हैं।
और शायद यही,
दोस्ती का सबसे ख़ूबसूरत रूप है।
-रतन कुमार कैथवास
3 महीने पहले
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