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ख्वाबों के अंदाज अलग हैं

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ख़्वाबों के अंदाज़ अलग हैं, शरबत का कुछ स्वाद अलग है,
        
                                                    
                            
हर मौसम की अपनी रंगत, हर मौसम का संवाद अलग है।
नीरो की बंसी के सुर में जाने कैसी तान बसी,
सुनने वालों की भीड़ अलग है, सुनने का अंदाज़ अलग है।

कोई चाँद को छूना चाहे, कोई तारों में घर ढूँढे,
कोई रेत के दरिया में भी पानी का संसार ढूँढे।
जिसकी जैसी प्यास यहाँ है, वैसी उसकी राह बनी,
किसी के हिस्से धूप बहुत है, किसी का सावन आज अलग है।

शब्द वही हैं, भाव वही हैं, फिर भी अर्थ बदल जाते हैं,
एक ही धुन को सुनकर कितने मन अपने रंग में गाते हैं।
कोई दर्द को गीत बनाए, कोई गीत में दर्द छुपाए,
दिल की अपनी भाषा होती, उसका हर उच्चार अलग है।

नीरो की बंसी बजती है तो शहर तमाशा देख रहा,
किसके घर में आग लगी है, कौन इसे पहचान रहा।
सुर में डूबी शाम भले हो, सवाल मगर बाकी हैं,
बंसी वाले का राग अलग है, सुनने वालों का हाल अलग है।

ख़्वाबों के अंदाज़ अलग हैं, जीने का भी ढंग अलग है,
किसी को मंज़िल प्यारी है तो किसी को सफ़र पसंद है।
तुम अपनी धुन में चलते रहना, दुनिया चाहे जो भी कहे,
हर दिल का अपना मौसम है, हर दिल का संसार अलग है।
-रतन कुमार कैथवास
एक महीने पहले
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