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अपना मनमीत बना लूँ

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरे गीतों को कैसे, मैं अपना मनमीत बना लूँ,
        
                                                    
                            
सागर की लहरों से कैसे, अपनी प्यास बुझा लूँ।
तू दूर सही, तेरी धुन तो साँसों में रहती है,
कैसे तेरी यादों को मैं अपनी साँस बना लूँ।

तेरी बातों में सावन है, आँखों में बरसात,
तेरे बिना ये शाम भी जैसे काली आधी रात ।
तू मिल जाए तो गीतों को फिर कोई अर्थ मिले,
वरना शब्द बहुत हैं मेरे, मगर कहाँ वो है बात ।

चाँद से तेरी रोशनी माँगूँ, तो रात कहाँ तक जाए,
हवा से तेरा पता पूछूँ, तो हवा भी क्या बतलाए।
जिस प्यास का कोई दरिया आँखों तक न आये,
उस प्यास को तेरे नाम की बारिश ही समझाए।

तेरे गीतों को कैसे मैं दिल की धड़कन बना लूँ,
सागर की लहरों से कैसे मैं मन की प्यास बुझा लूँ।
तू सामने नहीं फिर भी हर ओर तेरा एहसास है,
मुझको अपना कह दे बस, तो मैं अपना जहाँ बना लूँ।
-रतन कुमार कैथवास
एक महीने पहले
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