विज्ञापन

अपना हर अरमान लुटा दूँ

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तेरे ख्वाबों में कैसे आऊँ, तू चाहे तो नया ख्वाब बना ले,
        
                                                    
                            
सूनी आँखों में रंग भर दूँ, तू चाहे तो अपना इंद्रधनुष बना ले।

तेरे दिल में प्रीत जगा दूँ, सावन की पहली फुहारों में,
आने वाली बसंत में तुझको, सौ-सौ गीत सुना दूँ बहारों में।

तेरी राहों में दीप जला दूँ, अँधियारा सब दूर भगा दूँ,
तेरे रूठे मन को हँसा दूँ, हर पीड़ा को गीत बना दूँ।

पर सारे स्वर रूठे हैं जैसे, बाँसुरी में साँस नहीं है,
मन में सागर उमड़ा फिर भी, होंठों पर कोई आस नहीं है।

तू बस एक बार पुकार मुझे, मैं सारी दूरी भूल जाऊँ,
तेरे नाम की धुन छेड़ के फिर, अपनी दुनिया तुझमें पाऊँ।

फूलों से तेरी राह सजाऊँ, चाँद सितारे पास बुला लूँ,
तेरी एक मुस्कान के बदले, अपना हर अरमान लुटा दूँ।

तू चाहे तो मौसम बदल दूँ, सूखे मन में सावन ला दूँ,
तेरे ख्वाबों में घर कर जाऊँ, या फिर ख्वाब नया बना दूँ।

बस इतना सा अरमान बहुत है, तू मेरा एहसास समझ ले,
मैं गीतों में ढल जाऊँगा, तू बस मेरा विश्वास समझ ले।
-रतन कुमार कैथवास
5 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kumar

10488 कविताएं

View Profile