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आँखों में ठहरा हुआ है

RATAN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उसका ख़याल आया तो मौसम भी ठहरने लगा,
        
                                                    
                            
हवा को भी अब मेरे कमरे से गुज़रना कम पड़ता है।

वो सामने नहीं फिर भी आँखों में ठहरा हुआ है,
उसे देखने को अब आईना भी मुकम्मल नहीं पड़ता है।

हमने चाहा था उसे ख़ामोशी से उम्र भर,
मगर ये दिल है कि हर धड़कन में उसका नाम पढ़ता है।

रात गहरी हो तो उसकी याद और उतरती है,
चाँद भी मेरी तन्हाई का गवाह बनकर निकलता है।

उसकी आवाज़ की खुशबू अभी तक साँसों में है,
वक़्त गुज़रता है मगर एहसास कहाँ बदलता है।

एक उसकी याद है जो सुकून भी देती है,
एक ये दिल है जो उसी सुकून से फिर धड़कता है।
-रतन कुमार कैथवास
1 सप्ताह पहले
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