विज्ञापन

कॉलेज की उल्फ़त

Ranjeet Panday

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वो कॉलेज का पहला दिन, वो पहली-सी मुलाक़ात थी,
        
                                                    
                            
तेरी आँखों में जैसे कोई ख़ामोश-सी बरसात थी।
न तुझसे कुछ कहा गया, न मुझसे कुछ सुना गया,
मगर उसी ख़ामोशी में इश्क़ की पहली बात थी।

लाइब्रेरी की मेज़ पर रखी तेरी किताब याद है,
उसमें दबा हुआ गुलाब आज भी बेहिसाब याद है।
तू नोट्स के बहाने पास आकर मुस्कुरा देती थी,
मुझे हर एक मुस्कान का जवाब याद है।

कैंटीन की वो चाय भी ग़ज़ल-सी लगने लगी,
तेरे साथ हर दोपहर मुकम्मल-सी लगने लगी।
तेरा दुपट्टा हवा में जब भी लहराया था,
मेरी अधूरी-सी दुनिया भी मुकम्मल-सी लगने लगी।

इम्तिहानों से ज़्यादा तेरी आहट का इंतज़ार था,
हर लेक्चर में बस तेरा ही ख़याल दरकार था।
तू सामने होती तो अल्फ़ाज़ बिखर जाते थे,
तेरे जाने के बाद ही दिल को इख़्तियार था।

फिर एक दिन डिग्री मिली, और रास्ते बदल गए,
कुछ लोग शहर बदल गए, कुछ रिश्ते बदल गए।
तेरे नाम का आख़िरी पन्ना अब भी सँभाल रखा है,
वर्ना ज़िंदगी की किताब में कितने फ़साने बदल गए।

अब कभी उस कॉलेज के दर पर गुज़रता हूँ,
हर बेंच से तेरा नाम चुपके से पढ़ता हूँ।
लोग कहते हैं — वक़्त हर ज़ख़्म भर देता है,
मैं मुस्कुरा देता हूँ, मगर अंदर से बिखरता हूँ।

अगर कभी मिलो तो अजनबी मत बन जाना,
मेरी यादों को यूँ बेवजह रुस्वा मत बनाना।
जो इश्क़ कॉलेज की गलियों में बेआवाज़ पला था,
उसे किसी मज़ाक का किस्सा मत बनाना।
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

13403 कविताएं

View Profile

Manju Sharma

3567 कविताएं

View Profile

Shreyasi Satish

511 कविताएं

View Profile

Satish chandra

63 कविताएं

View Profile

Suresh Kumar

595 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

854 कविताएं

View Profile

Dn Chaubey

7473 कविताएं

View Profile