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इश्क़ का दीदार

Ranjana Sood

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दस्तक तो ज़रूर होती होगी
        
                                                    
                            
तुम्हारे दिल पर हमारी शरारत की।
लेके दबी आहट दहलीज़ तक आते भी हो,
फिर अपना हसीं साया क्यों बचाते हो।
चाहते भी हो तुम इश्क़ का दीदार,
फिर नज़रें क्यों हमसे चुराते हो।
बड़े नासमझ हो, दिल चुराकर
बेवफ़ाई का इल्ज़ाम लगाते हो।
2 महीने पहले
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