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उसी मोड़ पर

Ranjana Lata

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उसी मोड़ पर
        
                                                    
                            

तुम मिलोगे—
उसी मोड़ पर
जहाँ एक दिन
हमारी राहें
एक-दूसरे से बिछड़ गई थीं।

मुझे विश्वास है
समय चाहे जितना बीत जाए
कुछ रास्ते
अपने यात्रियों को
कभी नहीं भूलते।

वह पगडंडी अब भी
संभाले हुए है
मेरे पैरों के निशान
जो हर बार
तुम्हारी ओर बढ़े थे।

और वे पुराने पेड़—
जो चुपचाप
ऋतुओं का बदलना देखते रहे—
आज भी साक्षी हैं
उन अनगिनत प्रतीक्षाओं के
जब उनकी छाया तले
मैंने समय को ठहरते देखा था।

हवा ने कई बार
तुम्हारा नाम
मेरे कानों तक पहुँचाया
धूप ने कई बार
मेरे धैर्य की परीक्षा ली
पर मैंने उम्मीद का दामन
हमेशा थामे रखा।

मुझे यकीन है,
जब तुम लौटोगे
वह मोड़
वह रास्ता
वे पेड़
और मेरी प्रतीक्षा—
सब एक साथ मुस्कुराएँगे।
---रंजनालता
3 महीने पहले
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