विज्ञापन

प्रभु श्री राम की पूजा

Ramsingh Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रावण ने पूछा मंदोदरी से "मैं क्यों हारा?"
        
                                                    
                            
बोली तू चरित्रहिं वो चरित्रवान बस ये ही है अंतर सारा;
थोड़े से भी किंचित नहीं भयभी राम
निकले लेने सिया के बदले का अभिराम;
वानरसेना भी थी भारी पड़ी
लेने प्रभु की सी प्यारी
हनुमान, नल-नील, जामवन्त के प्रसंग
सुग्रीव विभीषण भी थे संग
थी सभा थोडी अकुलाई सी
पर एक इंसान था मौन खड़ा वो ब्रह्मा से भी लड़ जाता जो अपने बेटे का देख ये हाल
ना पूछो वो राम का हाल जो बेबक ही सब कुछ कह जाता है। वो रावण क्या बलशाली था जो एक स्त्री का हरण कर ले जाता।
ऐसे अत्याचारी का तो हाल बड़ा बेहाल। अंत में मेरे आराध्य श्री राम का ही नाम हुआ।
शक्ति की विश्व गाथा ही गलत है, शक्ति तो मेरे प्रभु राम में थी जिन्हें अपनी पत्नी का हरण करने वाले ने भी क्षमा किया। लेकिन रावण को तो प्रभु के हाथों ही मुक्ति चाहिए थी सो दे दी।
प्रेमानंद जी कहते हैं "बलवान वो नहीं जो मार दे, बलवान वो है जो क्षमा कर दे"
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile