विज्ञापन

मैं पढ़ूंगी

Rambriksh Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं पढ़ूंगी
        
                                                    
                            

पापा!
मुझे नहीं चाहिए “ नयी किताबें”
मैं पढ़ लूॅंगी “ पुरानी “ या
मांगी हुई “ किताबों ” से,
मैं नहीं देख पाती हूॅं मेरे लिए
आप की “ तपस्या”
आप का “ त्याग “
किन्तु,
हार न मानने की आप की “ सलाह “
आगे बढ़ने की “ प्रेरणा “
मुझे आगे बढ़ाता है,
लोगों के तानें ,मजे,हॅंसी कि
“ मैं बेटी हूॅं “
क्या करूंगी पढ़कर?
मुझे मजबूत करते हैं “ जीतने के लिए”
पापा!
मैं आप की “ भरोसा” हूॅं
आप का विश्वास हूॅं
मैं पढ़ूंगी, बढ़ूंगी
मिटाऊंगी बेटा - बेटी के बीच की भेद
मिटेगीं आप की मजबूरियाॅं।
-रामवृक्ष बहादुरपुरी
 
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

13466 कविताएं

View Profile

Dr fouzia

6957 कविताएं

View Profile

Mamta Tiwari

689 कविताएं

View Profile