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पल-दोपल जिसके साथ रहे उससे लगाव हो जाता है

Ram Naresh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पल-दोपल जिसके साथ रहे उससे लगाव हो जाता है।
        
                                                    
                            
गम विछुणन का उससे दिल नहीं सहन कर पाता है।।
सजीवों के साथ निर्जीवों से भी मन हो जाता अनुरागी।
पशु-पक्षी व पेड़-पौधों संग रहकर हो नहीं पाते वैरागी।।
एक-दूजे के दुःख को देखकर मन नहीं कर पाते काबू।
किसी तरह उसकी करें सहायता सोचते रहते हैं बाबू।।
कहना है आसान बहुत टूटे तारों पर कब अम्बर रोया।
दुःख दूजे का समझ सको तब जानोगे क्या है खोया।।
आगे बढ़ने की चाहत में सब संवेदन-हीन हो जाते हैं।
जब अपने पर पड़ती हैं तभी समझ हम पाते हैं।।
एक महीने पहले
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