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वक़्त की रेत

Rajiv Tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चलते रहिये वक़्त की रेत पर,
        
                                                    
                            
मुड़कर देखना वाजिब नहीं होता,
बस नज़र रहे सामने मुसलसल,
बंद आंखों रास्ता हासिल नहीं होता.

 
2 महीने पहले
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