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मेरी बोतल

Rajiv Tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मानिंद-ए-मय पी रहा हूँ ज़िंदगी,
        
                                                    
                            
देती नहीं सुरुर कमबख़्त मगर,
भरा क्या है तूने मिरी बोतल में,
खोते नहीं होश सोना चाहूँ अगर.

 
एक महीने पहले
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