पींगें बढ़ाने की उम्र में तूफ़ानों में
घिर गए,
कल को बचाने वही 'आज' से
भिड़ गए,
समझा था जिन्हें कमज़ोर और
बौना सबने,
वो जज़्बे और सोच में मीलों
आगे निकल गए।