गई रात मिरे अरमानों का चांद
समूचा पिंघल गया,
मिरे मुस्तक़बिल मिरी ख़ुशियों को
मिरा सपना निंगल गया,
रात कटती रही अधखुली आंखों
नींद की ग़फ़लत में,
सुबह होने तक नज़ारा बाहर का
बेतरह बदल गया.