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ग़फ़लत नींद की

Rajiv Tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गई रात मिरे अरमानों का चांद
        
                                                    
                            
समूचा पिंघल गया,
मिरे मुस्तक़बिल मिरी ख़ुशियों को
मिरा सपना निंगल गया,
रात कटती रही अधखुली आंखों
नींद की ग़फ़लत में,
सुबह होने तक नज़ारा बाहर का
बेतरह बदल गया.

 
2 महीने पहले
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