क्या रखा है तेरा उस दूर
चांद पर,
उस तक पहुँचने की इतनी
जद्दोजहद क्यूँ है?
इस ज़मीन की हालत पर भी
नज़र डाल ग़ाफ़िल,
इसकी बदहाली से इस क़दर
लापरवाह क्यूँ है?