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बदलती हवाऐं

Rajiv Tyagi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लगे कि सोच हो रही है पुरानी तो,
        
                                                    
                            
बदल डालिये,
नऐ जूते उठाकर रखने की चीज़ नहीं,
पहन डालिये,
चाल वक़्त की पहचान कर चाल
चलना है ज़रूरी,
बदलती हुई हवाओं को भांपकर,
सांसों को ढ़ालिये.

 
3 दिन पहले
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Anurag vishwkarma (aiyaar)

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