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चारों ओर तबाही होगी

Rajendra Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कब तक शोर शराबा होगा कब तक आवाजाही होगी
        
                                                    
                            
एक दिन वक्त ठहर जाएगा चारों ओर तबाही होगी

ना ही कोई अदालत होगी ना ही और गवाही होगी
रुतबे का ना खौफ रहेगा ना ही तानाशाही होगी
कब तक शोर शराबा होगा...

कितने भी तू रूप बदल ले चाहे कौड़ी लाख कमा ले
तेरी यह औकात नहीं है सांसों से एक रात चुरा ले
एक एक तेरी करतूतों की सूत समेत उगाही होगी
एक दिन वक्त ठहर जाएगा चारों ओर तबाही होगी

जब सिंहासन छोड़ चलेगा कोई साथ नहीं जाएगा
स्वप्न लगेगा ये जग सारा फूट फूटकर पछताएगा
दो गज कफ़न तुम्हारा होगा फूटी हुई सुराही होगी
एक दिन वक्त ठहर जाएगा चारों ओर तबाही होगी

रिश्तेदार हजारों होंगे घर होगा चौबारे होंगे
बाद आज के जितने भी हैं कोई नहीं तुम्हारे होंगे
कर्म अगर अच्छे होंगे तो चर्चा तेरी सदा ही होगी
एक दिन वक्त ठहर जाएगा चारों ओर तबाही होगी
एक महीने पहले
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