विज्ञापन

तेवर और तराज़ू

Rajeev kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हुनर की बात मत पूछो, यहाँ औक़ात चलती है,
        
                                                    
                            
जहाँ ईमान ज़िंदा हो, वहाँ हर बात खलती है।
नहीं रगड़ा कभी माथा किसी के आस्ताँ पर भी,
इसी तेवर की बदौलत हमारी आग जलती है।
ज़मीरों का जो करते थे सरेबाज़ार सौदा कल,
उन्हीं के नाम की तख़्ती पे अब ये दुनिया चलती है।
मैं अपने नाम के आगे कई तमगे सजा लेता,
जो कह देता कि हाँ! इस दौर में हर बात बिकती है।
बड़े ओहदों की ज़ीनत आज हम भी बन गए होते,
मगर सच बोलने के इस चलन से जान बचती है।
यहाँ रुतबा हुनर से नहीं, झुकने से मिलता है,
जो झुक गया, बस उसकी ही किस्मत बदलती है।
जो बिक कर बैठ गए कुर्सी पे, वो उसूल लिखते हैं,
जो ईमान बचा गए, दुनिया नालायक कहती है!
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all