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जिसे तुम्हारे प्रकाश की जरूरत नहीं

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सुनो, त्याग वहीं करो
        
                                                    
                            
जहाँ उसकी जरूरत हो,
दोपहर में दिया जलाने से
अंधकार दूर नहीं होता,
बस दीये का वजूद
खत्म हो जाता है।

हर जगह खुद को मिटा देना
त्याग नहीं होता,
कभी-कभी अपने अस्तित्व को बचाना भी
जरूरी होता है।

जिसे तुम्हारे प्रकाश की जरूरत नहीं,
वहाँ जलते रहना व्यर्थ है,
दीया वही सार्थक है
जहाँ सच में अंधेरा हो।
— रजनी
एक महीने पहले
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