विज्ञापन

सुख-दुःख का भ्रम

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सुख-दुःख का भ्रम
        
                                                    
                            

आज मैंने अनुभव कर लिया,
दूसरों को सुख देने में
मैंने कोई कसर नहीं छोड़ी,
किसी को खुश करने में
तन, मन और धन—
सब कुछ लगा दिया,
फिर भी किसी को खुश न कर पाई।

तब समझ आया—
कोई किसी को सुख दे नहीं सकता,
और न ही कोई किसी को
दुःख दे सकता है।

सुख और दुःख तो भीतर की अनुभूति हैं,
ये किसी वस्तु की तरह
दिए या लिए नहीं जा सकते।

अब न किसी को सुख देना है,
न किसी को दुःख देना है,
बस अपने कर्म सच्चे रखने हैं,
अपने मन को निर्मल रखना है।

क्योंकि जो अमूर्त है,
उसका देना-लेना कैसा?
सुख-दुःख के पीछे भागना भी
शायद एक सुंदर-सा भ्रम है।
— रजनी
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

13466 कविताएं

View Profile

Dr fouzia

6957 कविताएं

View Profile

Mamta Tiwari

689 कविताएं

View Profile