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जीवन अपने सारे पत्ते नहीं खोलता

Rajani Shakyawar

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                            जीवन अपने सारे पत्ते नहीं खोलता
        
                                                    
                            

हम अपने भविष्य की कितनी चिंता करते हैं,
हर आने वाले कल को
आज ही जान लेना चाहते हैं।

मगर जीवन अपने सारे पत्ते
एक साथ नहीं खोलता,
वह तो बस एक-एक कदम
हमारे सामने रखता है।

जीवन के सभी निर्णय
हमारे नहीं होते,
कुछ प्रकृति के होते हैं,
कुछ समय के।

फिर भी हम बेचैन रहते हैं
उस कल के लिए
जो अभी आया ही नहीं।

लेकिन जिन पुरानी पीड़ाओं से
हम निकल चुके हैं,
उनसे भी तो कभी
हमें डर लगता था।

जब उनसे गुज़र आए हैं,
तो भविष्य की परेशानियों से भी
गुज़र जाएंगे।

— रजनी
2 महीने पहले
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