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लेकिन आज इसे जीकर भी देखा है।

Rajani Shakyawar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            घर और औरत
        
                                                    
                            

मेरा ऐसा मानना है,
अपने अनुभव से कह रही हूँ—
सुना तो बहुत था,
लेकिन आज इसे जीकर भी देखा है।

औरत चाहे तो अपनी दुआओं से
अपने पति को राजा बना दे,
और चाहे तो अपनी बद्दुआओं से
उसे भिखारी भी बना दे।

घर तब तक ही घर रहता है
जब तक औरत सहती है,
चुप रहती है,
रिश्तों को जोड़ने की कोशिश करती है।

जिस दिन औरत
सहना छोड़ देती है,
उसी दिन घर को
टूटने में देर नहीं लगती।

आज जो परिवार चल रहे हैं,
उनमें कहीं न कहीं
औरत की सहनशीलता,
उसका त्याग और उसका धैर्य
सबसे बड़ा सहारा है।

इसलिए औरतों,
अपने घरों को बचाए रखो,
उन्हें प्रेम से बनाए रखो—
क्योंकि घर केवल दीवारों से नहीं,
तुम्हारे होने से घर है।

पर इतना याद रखना—
घर बचाना तुम्हारी जिम्मेदारी हो सकती है,
पर हर अन्याय सहना
तुम्हारी मजबूरी नहीं।
— रजनी
एक महीने पहले
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