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भ्रष्टता का डर

Rajani Shakyawar

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                            भ्रष्टता का डर
        
                                                    
                            

जो भ्रष्ट होते हैं,
वे स्पष्ट नहीं होते,
उन्हें छिपकर रहना पड़ता है,
कम बोलना पड़ता है।

वे अपने अतीत को
हमेशा याद रखते हैं,
क्योंकि भीतर कहीं
एक डर जिंदा रहता है—
कहीं कोई राज़ खुल न जाए,
कहीं बीता हुआ सच
आज सामने न आ जाए।

इसलिए उनके शब्दों में
साफ़गोई नहीं होती,
व्यवहार में सहजता नहीं होती,
और आँखों में
एक अनकहा भय रहता है।

सच को छिपाने वाला
दुनिया से भले छिप जाए,
लेकिन अपने अतीत से
कभी नहीं छिप सकता।

— रजनी
5 दिन पहले
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